छत्तीसगढ़ में कथित मेडिकल सप्लाई घोटाले की जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को बड़ा कदम उठाया। एजेंसी ने रायपुर, दुर्ग और आसपास के इलाकों में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की। ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम के लिए बनाए गए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है।
सूत्रों के अनुसार, छापे उन सरकारी अधिकारियों, सप्लायर्स, एजेंटों और बिचौलियों के परिसरों में मारे गए, जिनका नाम भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में सामने आया था। इस घोटाले की जड़ें अप्रैल 2024 में दायर एक आरोपपत्र में छिपी हैं, जिसमें चिकित्सा उपकरणों और रसायनों की खरीद में भारी गड़बड़ी का आरोप है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2022 से अक्टूबर 2023 के बीच छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) ने जरूरत का मूल्यांकन किए बिना बड़ी मात्रा में उपकरण खरीदे, जिससे राज्य को करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस खरीद प्रक्रिया में मोक्षित कॉर्पोरेशन और उससे जुड़ी एक फर्जी कंपनी की भूमिका प्रमुख मानी जा रही है।
ACB/EOW जांच में कई अन्य कंपनियां भी सवालों के घेरे में आई हैं, जिनमें दुर्ग की सीबी कॉर्पोरेशन, पंचकूला की रिकॉर्ड्स एंड मेडिकेयर सिस्टम, और रायपुर की श्री शारदा इंडस्ट्रीज शामिल हैं। ईडी की ताजा छापेमारी से यह साफ हो गया है कि शासन स्तर पर फैले इस कथित भ्रष्टाचार की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
जनता को उम्मीद है कि इस घोटाले में शामिल सभी दोषियों को जल्द कानून के कठघरे में लाया जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश जाएगा।
